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निराला भोला

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श्रावण मास भगवान शंकर को समर्पित है। हर तरफ भोले हैं। शिव के मतवाले हैं। कांवड़ ही कांवड़। गंगाजल की यात्रा। गंगाधर का गान। मानो. शंकर जी की बारात चढ़ रही है। वस्तुत: यह शंकर जी के पाणिग्रहण का ही उत्सव है। श्रावण मास की शिवरात्रि भगवान शंकर और पार्वती के मिलन का उत्सव है। फाल्गुन मास की शिवरात्रि ही महाशिवरात्रि कही गई। महाशिवरात्रि निराकार भक्ति का पर्व है तो शिवरात्रि साकार भक्ति का पर्व। एको हि रुद्रो द्वितीयानस्तु..। एक ही रुद्र है दूसरा नहीं है। यह भारतीय सनातन परंपरा में एकेश्वरवाद के सिद्धांत का निष्पादन करती है। हम बहुदेववादी माने जाते हैं। निराकारत्व की बात हम नहीं करते। लेकिन शंकर जी के सत्यं, शिवम् और सुंदरम् का संदेश ही इस एकेश्वरवाद में निहित है। सत्य क्या है...सृजन-संहार। शिवम क्या है...संतान और सुंदरम क्या है....सृष्टि। इन्हीं तीनों के निहितार्थ बना ऊं। अ+उ+म। अकार, उकार और मकार। यानी सृष्टि, पालन और संहार। यही सनातन सत्य है और इसी को हम यह कहकर अंगीकार करते हैं कि सबको पैदा करने वाला, पालन करने वाला और संहार करने वाला तो परमपिता परमेश्वर है। फाल्गुन मास की महाशिवरात्र...