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हनुमान जी के पाठ और अनुष्ठान
श्री गुरु हनुमान जी के चरणों में वंदन करते हुए उनके कुछ सिद्ध अमोघ पाठ के विषय में चर्चा करते हैं। इनमें से कुछ पाठ आप नियमित करते होंगे। लेकिन कुछ नहीं। बाबा के समस्त पाठ और मंत्र ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं। भक्त को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता। यदि होता भी है तो वह बाबा के प्रताप से शीघ्र ही मुक्त हो जाता है। यहां हम कुछ विधि आपको बता रहे हैं। यदि इन उपायों के साथ आप बाबा का पाठ करते हैं तो तीनों लोकों के ताप से आपको मुक्ति मिलती है। सुन्दरकाण्ड का पाठ श्रीरामचरित मानस का एक अध्याय है सुंदरकांड। प्रभु राम को यह सबसे प्रिय है। भगवान शँकर जी भी इसका गुणगान करते हैं। श्रीरामचरित मानस का यह हृदय है। इसमें सकल स्तुति है। यह अमोघ है। जो कोई इसका पाठ करता है, उसके दारुण दुखों का अंत होता है। सुंदरकांड पढ़ने का सही समय ब्रह्म मूहूर्त यानी सवेरे 4 बजे। यह सबसे उपयुक्त समय है। उसके बाद रात्रि 9 बजे और अपराह्न का समय यानी 2 बजे के बाद । वैसे आप कभी भी कर सकते हैं। यदि संपूर्ण पाठ आप नहीं कर सकते तो मंगलाचरण तो प्रतिदिन कीजिए। इसके साथ ही प्रबिसि नगर कीजे सब काजा.....और कहेऊ तात अस मोर प्रनामा की चौपाई अपनी नियमित पूजा में शामिल कर लें। बहुत लाभ होगा। जब भी परेशान हों तो इन चौपाइयों को 11 या 21 बार कर लीजिए।
श्रीसुंदरकांड के अनुष्ठान सरल अनुष्ठान श्री सुंदरकांड के अनुष्ठान अमोघ हैं। नियत समय पर प्रतिदिन 5,9,11,21,31 दिन श्री सुंदरकांड का पाठ कीजिए। पहले संकल्प कीजिए। बाबा से अपनी मनोकामना कहिए। फिर एकाग्रचित्त होकर पाठ कीजिए। पाठ के दौरान थोड़ी परेशानी आ सकती हैं। जैसे बुखार आदि। लेकिन आपका अनुष्ठान पूर्ण हो जाएगा। पूर्णता दिवस पर हवन कीजिए। बाबा को चोला चढाइये। यह सरल अनुष्ठान है। अनुष्ठान अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन कीजिए। सात्विक भोजन कीजिए। कठिन अनुष्ठान यह अनुष्ठान 49 या 59 दिन का होता है। प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ कीजिए। पांच बार हनुमान चालीसा का पाठ कीजिए। मंगलवार और शनिवार को बाबा की अखंड ज्योति जलाएं। बेसन के लड्डू का प्रशाद चढाएं। ऊं हनुमते नम: की 11 माला कीजिए। ये पाठ लगातार होने हैं। इस दौरान भी बाधाएं आ सकती हैं अंतिम चरण में। यानी 40 या 50 पाठ होने के बाद। तब आप ऊं नम: शिवाय की एक माला कर लीजिए। आपके पाठ पूरे हो जाएंगे। बाबा आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। बाल तोड़, बुखार और पेट की दिक्कत हो सकती है। घबराइये नहीं। बाबा की कृपा से पाठ पूरे होंगे।
हनुमान चालीसा अनुष्ठान आप और हम प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। यदि आप प्रतिदिन 5 या 11 बार हनुमान चालीसा करते हैं तो बहुत अच्छा है। लेकिन यदि बजरंगबाण भी अंत में कर लेते हैं, तो इसका लाभ दोगुना हो जाता है। कभी अवसर मिले तो वर्ष में एक बार 108 हनुमान चालीसा कर लेनी चाहिए। बजरंगबाण-रोग मुक्ति का अनुष्ठान बाबा का यह पाठ सारे रोगों का नाश करता है। आपको भूत-प्रेत, ऊपरी असर से बचाता है। इसमें बाबा के तांत्रिक मंत्र हैं। इसकी ऊर्जा अधिक है। पावर अधिक है। इसलिए, इसका पाठ अधिक नहीं करना चाहिए। इससे शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। अत: बजरंगबाण से पहले और बाद में अवश्य हनुमान चालीसा करें। बजरंगबाण का भी अनुष्ठान है। आप एक लोटा जल सामने रखिए। फिर तीन बार बजरंगबाण पढ़िये। इस जल का सेवन कीजिए। बीमार हों तो दवा भी इससे ले सकते हैं। आप रोगमुक्त हो जाएंगे। वड्वानल स्त्रोत तांत्रिक दृष्टि से यह सर्वाधिक पावरफुल मंत्र है। इसको सुनने मात्र से सारी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है। इस पाठ को केवल एक बार रात में सुनना चाहिए। अधिक संख्या में न सुनें। उपरोक्त सभी पाठ पूर्ण होने पर बाबा की आरती करें। आरती के बाद एक लौंग का जोड़ा अपने ऊपर से उतारकर कपूर में जला दें। बहुत लाभ होगा। बाबा के सिद्ध मंत्र मंत्र 1.ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय । सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा इस मंत्र की यदि एक माला (108) बार करते हैं तो सारे दुख, रोग दूर हो जाते हैं। श्री हनुमान गायत्री मंत्र 1.ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय, धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् । या 2.ऊँ अंजनीसुताय विद्महे वायुपुत्राय धामहि, तन्नो मारुति प्रचोदयात।. ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी से जुड़ा कोई भी मंत्र या पाठ अन्य किसी भी मंत्र से अधिक शक्तिशाली होता है। हनुमान जी अपने भक्तों को उनकी उपासना के फल में बल और शक्ति प्रदान करते हैं। पाठ या अनुष्ठान संबंधी कोई जिज्ञासा हो तो आप पूछ सकते हैं ।
पंडित सूर्यकान्त द्विवेदी

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