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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष

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कान्हा के बारे में यह भी जानिए भगवान श्रीकृष्ण पूर्णावतार हैं। लीलाधर। वह समस्त प्राणियों के हृदय में अनेकानेक रूपों में वास करते हैं। श्रीकृष्ण ने सभी को जाना लेकिन उनको कोई नहीं जान सका। वह बालक हैं, किशोर हैं, योगीराज हैं, कर्मपुरुष हैं, वह गुरु हैं, वह गोपाल हैं, केशव हैं, माधव हैं, मुरलीधर हैं, रासविहारी हैं, जगत विहारी हैं, युग प्रवर्तक हैं, प्रेमी हैं, शासक हैं, युद्ध संचालक, महान धनुर्धर हैं, सारथी हैं, मित्र हैं, करुणावतार हैं, दीनानाथ हैं, स्त्री उद्धारक हैं, मातृभक्त हैं, वेदों के विख्याता-आख्याता, अष्टावक्र गीता के उद्घोषक, कर्मप्रधान, नीति प्रधान, योग प्रधान, सांख्य प्रधान, गोपीजनवल्लभ, अच्युतानंद आदि अनेकानेक रूप से ख्यात हैं। लीलाएं अनंत। लेकिन उनको प्रिय है- अपनी बाल लीला। वो भी कौन सी- जब उन्होंने मुंह में मिट्टी रख ली। संभवतया यही कारण है कि कलियुग में भी उनको अपनी यही बाललीला पसंद है। वह बाल गोपाल अर्थात ठाकुरजी के रूप में ही अपने भक्तों के पास रहना चाहते हैं। आइये, ठाकुर जी के बारे में थोड़ा जानने का प्रयास करते हैं.... आठ का अंक : कृष्ण के जीवन में आठ के अंक का ...
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हनुमान जी के पाठ और अनुष्ठान श्री गुरु हनुमान जी के चरणों में वंदन करते हुए उनके कुछ सिद्ध अमोघ पाठ के विषय में चर्चा करते हैं। इनमें से कुछ पाठ आप नियमित करते होंगे। लेकिन कुछ नहीं। बाबा के समस्त पाठ और मंत्र ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करते हैं। भक्त को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता। यदि होता भी है तो वह बाबा के प्रताप से शीघ्र ही मुक्त हो जाता है। यहां हम कुछ विधि आपको बता रहे हैं। यदि इन उपायों के साथ आप बाबा का पाठ करते हैं तो तीनों लोकों के ताप से आपको मुक्ति मिलती है। सुन्दरकाण्ड का पाठ श्रीरामचरित मानस का एक अध्याय है सुंदरकांड। प्रभु राम को यह सबसे प्रिय है। भगवान शँकर जी भी इसका गुणगान करते हैं। श्रीरामचरित मानस का यह हृदय है। इसमें सकल स्तुति है। यह अमोघ है। जो कोई इसका पाठ करता है, उसके दारुण दुखों का अंत होता है। सुंदरकांड पढ़ने का सही समय ब्रह्म मूहूर्त यानी सवेरे 4 बजे। यह सबसे उपयुक्त समय है। उसके बाद रात्रि 9 बजे और अपराह्न का समय यानी 2 बजे के बाद । वैसे आप कभी भी कर सकते हैं। यदि संपूर्ण पाठ आप नहीं कर सकते तो मंगलाचरण तो प्रतिदिन कीजिए। इसके साथ ही प्रबिसि नगर...