शिव बनो-शिव जपो
परिचय संत प्रवर विजय कौशल महाराज रामकथा वाचक हैं। उनका मेरे ऊपर अनन्य उपकार है। उनकी सदकृपा से मुझे हनुमानजी के रूप में श्रीगुरु की प्राप्ति हुई। संत विजयकौशल जी की देश-विदेश में श्रीरामकथा की अमृतवाणी गूंजती है। हाल ही में वह श्रीलंका में अशोक वाटिका में श्रीरामकथा का आख्यायन करके आए हैं। सुंदर गेय शैली में श्रीरामकथा का अमृतपान कराने वाले कौशलजी कथा के साथ सामाजिक-राष्ट्रीय संदर्भो की विशद मीमांसा करते हैं। व्रंदावन में आश्रम, निवास और प्रवास। श्रीरामचरितमानस के शिव प्रसंग में पार्वती जी की विदाई के प्रसंग का कारुणिक चित्रण हर आंख को रुला देता है। आप भी पढिए। सूर्यकांत द्विवेदी शिव कृपा चाहिए तो जीवन को श्रद्धा से भरिए -संत प्रवर विजय कौशल हमारे ऋषि-मुनियों का यह अनुभव है कि इस सृष्टि के प्रारंभ होने के पूर्व भी सर्वत्र शिव तत्व ही व्याप्त था। शिव तत्व से ही सृष्टि उत्पन्न हुई। इसलिए सृष्टि के जन्मदाता का विचार तो हो सकता है, लेकिन शिव तो अजन्मा हैं, शिव तो अविनाशी हैं, अखंड हैं। वे तो स्वयं मृत्यु के स्वामी हैं, संहार के देवता हैं। अरे! संहारक का कौन संहार करेगा। भ...