यूं हैं श्रीकृष्ण पूर्णावतार
जो कहना है कहो मगर कान्हा से, बुरा नहीं मानते हमारे माधव -संत प्रवर विजय कौशल हमारे समस्त अवतारों में भगवान श्री कृष्ण ऐसे अनोखे अवतार हैं जिनका जन्मोत्सव विश्व के हर कोने में निवास करने वाला हल वर्ग का हिंदू बड़े उत्साह, उल्लास और भाव से मनाता है। भारत में तो जेलों में, थानों में तथा पुलिस लाइनों में इतने उल्लास के साथ मनाते हैं कि ऐसा लगता है कि मानों भगवान श्री कृष्ण इस विभाग के निज देव हों। शास्त्रज्ञ विद्वानों में कई बार इस विषय पर शास्त्रार्थ होता है कि भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण में छोटा बड़ा कौन है। उनकी कलाओं की संख्या पर अनेक तरह की चर्चा होती है। वाद-विवाद होता है। होना भी चाहिए क्योंकि हिंदू समाज जड़ समाज नहीं है। पूर्ण विकसित चिंतन वाला समाज है। अपने भगवान पर खुलकर चर्चा करने की छूट और साहस यह हिंदुओं के पास है। अन्य समाज में तो भगवान के बारे में कुछ बोल पाना महाअपराध माना जाता है। कई बार इनकी चर्चाएं दंगे और अशांति का कारण भी बन जाती हैं। जीवन में आनंद और प्रसन्नता के लिए मनुष्य की चिंतन धारा प्रवाहमान होनी चाहिए। जड़ता मनुष्य को गूढ़ ब...